सत्य वचन

जीवन के बीते हुए साल छोटे और,

ये एक साल हमसे बड़े लगने लगे है।


जिस भीड़ में रहकर भी हम उसे एक अपना अलग ही मजा करते थे।
आज दूरी में भी रहकर हम,सहमे सहमे से रहते हैं।।

हमनें सारी खुशियां ,कुछ पलों के लिए रोकी थी।
पर किसको पता था,वो खुशियां ही कुछ पल की थी।।

घर में रहने वाली ज़िन्दगी को पहले,बेगार समझा जाता था।
आज उस ज़िन्दगी को ,सबसे सुरक्षित समझा जाता है।

कोई तो बताये कौन सी,हमसे ऐसी खता हो गयी ।
जो हम ज़िन्दगी से और ,ज़िन्दगी हमसे इतनी खफा हो गयी।


                                         नेहा बघेल।।।

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